हथकरघा और कपड़ा विभाग डेटा

हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग से सम्बन्धित डाटा

  • वर्तमान में पूरे भारत में 43.31 लाख बुनकर हथकरघा पर कार्य कर रहे हैं जिसमें 78 प्रतिषत महिलायें तथा 22 प्रतिषत पुरूश हैं। जिसमें 87 प्रतिषत बुनकर ग्रामीण क्षेत्रों तथा 13 प्रतिषत बुनकर षहरी क्षेत्रों में कार्य करते हैं। उत्तर प्रदेष में 2 लाख 59 हजार हथकरघा बुनकर बुनाई पेषा में लगे हैं।
  • भारत कपास एवं जूट के उत्पादन में विष्व में प्रथम स्थान पर है। टेक्सटाइल फाइबर एवं सिल्क के उत्पादन में भारत द्वितीय स्थान पर है।
  • भारत से कुल निर्यात में से टेक्सटाइल एवं अपैरेल निर्यात 15 प्रतिषत है।
  • भारत के कुल जीडीपी0 में टेक्सटाइल एवं अपैरेल सेक्टर का हिस्सा 4 प्रतिषत है।
  • भारत के टेक्सटाइल सेक्टर से लगभग 51 मिलियन लोग सीधा रोजगार से जुड़े हैं तथा 68 मिलियन लोग अप्रत्यक्ष रूप से इस क्षेत्र से जुड़े हैं।
  • वर्तमान में भारतीय टेक्सटाइल उद्योग लगभग न्ै$ 115 विलियन का है। जो 2024 तक बढ़कर न्ै$ 350 विलियन पहंुचने की सम्भावना है।
  • मा0 प्रधानमंत्री जी द्वारा टेक्सटाइल सेक्टर हेतु 100 प्रतिषत थ्क्प् (प्रत्यक्ष विदेषी निवेष) लागू किया गया है।
  • उत्तर प्रदेष प्राचीन समय से ही अपनी कलात्मक बुनाई के वस्त्रों के लिये विष्व प्रसिद्ध रहा है, जिसमें वाराणसी की सिल्क साडि़यां, सीतापुर एवं कानपुर की दरियां, गोरखपुर के बेडकवर, मेरठ के पर्दे तथा गाजियाबाद के टेरीटावल प्रमुख उत्पाद हैं।
  • आजमगढ़, बाराबंकी, इटावा, फर्रूखाबाद, गोरखपुर, कानपुर, सीतापुर, मिर्जापुर, मेरठ, वाराणसी, बिजनौर आदि जनपद प्रदेष के हथकरघा बुनकर बाहुल्य जनपद है।
  • प्रदेष में पावरलूम उद्योग भी उत्तरोत्तर प्रगति कर रहा है। प्रदेष में लगभग 4.21 लाख पावरलूम बुनकर अपनी रोजी-रोटी पावरलूम बुनाई उद्योग से कमा रहे हैं। अम्बेडकर नगर, मऊ, मेरठ, गोरखपुर, वाराणसी, झांसी, कानपुर, इटावा आदि मुख्य पावरलूम बुनकर बाहुल्य जनपद है।
  • उत्तर प्रदेष में लगभग 1 लाख 10 हजार हथकरघे एवं 2 लाख 20 हजार पावरलूम कार्यरत है। प्रदेष में वस्त्रोद्योग क्षेत्र में भी बहुत सी इकाईयां स्थापित हैं। प्रदेष में 58 स्पिनिंग मिल तथा 74 टेक्सटाइल मिल नान ैैप् सेक्टर में स्थापित है।
  • उप्र0 भारत के कुल कपड़ा उत्पादन का 13.24 प्रतिषत कपड़ा उत्पादन कर रहा है। उप्र0 देष का सबसे बड़ा कपड़ा बाजार भी है।
  • हथकरघा बुनकरों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास तथा उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के उद्देष्य से हमारी सरकार द्वारा निम्न योजनायें क्रियान्वित की जा रही हैं।
  • (अ) हथकरघा बुनकरों हेतु राज्य सरकार की योजनायें
  • 1. हथकरघा बुनकरों को विद्युत दर में छूट की प्रतिपूर्ति
  • 2. संत कबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार योजना
  • 3. हथकरघा क्षेत्र के प्रषिक्षणार्थियों को छात्रवृत्ति की सहायता
  • हथकरघा बुनकरों के विकास एवं कल्याण हेतु भारत सरकार द्वारा राश्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत अनेंक योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
  • (ब)हथकरघा बुनकरों हेतु भारत सरकार की योजनायें
  • 1. क्लस्टर विकास कार्यक्रम -
  • 2. वाराणसी मेगा हैण्डलूम क्लस्टर योजना -
  • 3. प्रधानमंत्री हथकरघा बुनकर मुद्रा योजना-
  • 4. हथकरघा विपणन सहायता
  • महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजनाप्रधानमंत्री जीवन ज्योती बीमा योजना पावरलूम कामगारों के लिए समूह बीमा योजना
  • पावरलूम बुनकरों को भी उनके आर्थिक विकास हेतु प्रेरित किया जा रहा है। उनके विकास एवं कल्याण हेतु अनेक योजनायें संचालित की जा रही है।
  • (स) पावरलूम क्षेत्र हेतु राज्य सरकार की योजनायें
  • 1. बुनकर बाहुल्य क्षेत्रों मे विद्युत आपूर्ति हेतु स्वतन्त्र विद्युत फीडर की व्यवस्था
  • 2. जनेष्वर मिश्र पावरलूम उद्योग विकास योजना
  • 3. पावरलूम क्षेत्र का विकास (एस0सी0पी0) योजना
  • 4. पावरलूम बुनकरों को विद्युत दर में छूट की प्रतिपूर्ति योजना
  • (द) उत्तर प्रदेष हैण्डलूम, पावरलूम, सिल्क, टेक्सटाइल एवं गारमेन्टिंग पालिसी-2017:- उत्तर प्रदेष हैण्डलूम, पावरलूम, सिल्क, टेक्टाइल एवं गारमेन्टिंग पालिसी-2017 बनायी गयी है। जिसके अन्तर्गत सभी वित्तीय सुविधाओं एवं उपादान योजनाओं का लाभ वस्त्र उद्योग से जुडी इकाईयों को दिया जायेगा।
  • (क) उत्तर प्रदेष टेक्सटाइल एवं गारमेन्टिंग पाॅलिसी -2017 में अनुमन्य वित्तीय प्रोत्साहन
  • भूमि की कीमत पर अनुदान:- सरकारी संस्था से भूमि खरीद पर गौतमबुद्ध नगर में 35 प्रतिषत षेश प्रदेष में 50 प्रतिषत तक अनुदान जो प्रोजेक्ट कास्ट के 5 प्रतिषत तक सीमित होगा।
  • स्टाम्प ड्यूटी में छूट:- 75 प्रतिषत से 100 प्रतिषत प्रदेष के आंचलिक क्षेत्रवार
  • पॅूजीगत उपादान: 25 प्रतिषत प्लान्ट एवं मषीनरी के निवेष पर 2 करोड़ से 100 करोड़ तक
  • ब्याज उपादान:-
  • ंद्ध 7 प्रतिषत 7 वर्श तक ज्न्थ्ै प्लान्ट मषीनरी पर 1.5 करोड़ तक
  • इद्ध 5 प्रतिषत 7 वर्श तक, अवस्थापना विकास हेतु एक करोड़ तक
  • राज्य जी0 एस0 टी0 पर छूट:- 60 प्रतिषत से 90 प्रतिषत तक प्रदेष के आंचलिक क्षेत्रवार
  • इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी में छूटः- 100 प्रतिषत 10 वर्श तक
  • ई0पी0एफ0 प्रतिपूर्ति:- 50 प्रतिषत से 60 प्रतिषत तक, श्रमिक संख्या के आधार पर
  • अन्य सुविधायें:-
  • ंण् माल-भाड़ा प्रतिपूर्ति-25 प्रतिषत से 75 प्रतिषत तक वर्श के अनुसार
  • इण् मण्ड़ी षुल्क में छूट 5 वर्श तक
  • बण् प्लग एण्ड प्ले सुविधा
  • (ख) टेक्सटाइल पार्क एवं औद्योगिक आस्थानों हेतु वित्तीय प्रोत्साहन
  • ब्याज उपादन:-
  • ंण् भूमि खरीद पर 50 प्रतिषत वार्शिक ब्याज पर 7 वर्शो तक 01 करोड़ प्रति वर्श
  • इण् अवस्थापना विकास पर 60 प्रतिषत वार्शिक ब्याज पर 7 वर्शो तक 10 से 50 करोड़ तक
  • स्टाम्प ड्यूटी में छूट:-
  • ंण् 100 प्रतिषत पार्क विकासकर्ता को
  • इण् 50 प्रतिषत प्रथम खरीदार को
  • स्टाफ क्वार्टर/हास्टल/डोरमेट्री के निर्माण पर छूट:-
  • ंण् 60 प्रतिषत वार्शिक ब्याज पर 7 वर्शांे तक
  • इण् 100 प्रतिषत स्टाम्प ड्यूटी में छूट (गौतमबुद्धनगर को छोड़कर)

     

  • अवस्थापना विकास हेतु राज्य सरकार का सहयोग:- सम्पर्क मार्ग ट्रंकड्रेन, विद्युत लाइन, ट्रांसफार्मर एवं विद्युत उप केन्द्र, फायर स्टेषन ।
  • (ग) मेगा एवं सुपर मेगा इकाईयेां हेतु सुविधायें
  • रोजगार सृजन अनुदान:-
  • ंण् 15000 सिलाई मषीन वाली गारमेन्टिंग इकाई को रू0 3200 प्रति माह, प्रति श्रमिक की दर से
  • सुपर मेगा इकाई में वित्तीय सुविधाओं को बढ़ाना:- केस-टू-केस आधार पर
  • राज्य जी0 एस0 टी0 में छूट:- 80 प्रतिषत पूरे प्रदेष में
  • अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला, दिव्यांगोें की स्वामित्व वाली इकाईयों को अतिरिक्त सुविधायें देय ।
  • उ0 प्र0 के मूल निवासी अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला, बी0पी0एल0 श्रमिकों को रोजगार प्रदान करने वाली इकाईयों को विषेश सुविधा देेय
  • प्रदेष के पिछडे़ क्षेत्रों जैसे बुन्देलखण्ड ,पूर्वान्चल में वस्त्र उद्योग स्थापित करने पर विषेश सुविधा देय
  • रेषम की इकाईयों को भी पाॅलिसी के अन्तर्गत विषेश सुविधायें प्रदान करने का प्राविधान किया गया है।